[BHUKAMP UPDATE ]

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जमीन से मात्र 6 किमी. नीचे भूकंप BHUKAMP का केंद्र रहा है,

BHUKAMP UPDATE – 2023

NOIDA नोएडा: शहर से मात्र 55 किमी दूर बागपत और शामली के बीच का एरिया दो बार भूकंप का केंद्र रह चुका है। इस बार भूकंप का केंद्र नोएडा का सेक्टर-128 था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट के अनुसार, भूकंप रात 8 बजकर 57 मिनट पर आया था। भूंकप का झटका केवल 1.5 रिक्टर स्केल का होने की वजह से महसूस नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि यह झटका यदि 5 रिक्टर स्केल या उससे अधिक का होता तो यहां काफी नुकसान हो सकता था। जमीन से मात्र 6 किमी. नीचे भूकंप BHUKAMP का केंद्र रहा है, लेकिन तीव्रता मामूली होने की वजह से हाइराइज सोसाइटी को किसी प्रकार के अंदरूनी नुकसान की संभावना नहीं है।

भूकंप BHUKAMP

नोएडा के सेक्टर-128 में एक BHUKAMP का केंद्र रहाभूकंप BHUKAMP का झटका 1.5 रिक्टर स्केल का हुआ, जो तीव्रता कम होने की वजह से महसूस नहीं हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि यह झटका और तीव्र होता तो नुकसान हो सकता था। नोएडा के डिजास्टर मैनेजमेंट सेल एक्टिव नहीं है और कई बिल्डिंगों में भूकंप रोधी इंतजाम नहीं है। विशेषज्ञों ने अधिक संवेदनशीलता बनाने की सलाह दी है। आपदा विशेषज्ञ मनोज कुमार सिंह ने भी सलाह दी है कि लोगों को प्रशिक्षण दिए जाने चाहिए।

NOIDA ME BHUKAMP


सिस्मिक जोन 4 में आता है यह क्षेत्र, महसूस नहीं हुए हल्के झटके
संवेदनशीलता के मामले में एनसीआर सिस्मिक जोन-4 में आता है
2012 से 2019 तक एनसीआर 8 बार BHUAMP भूकंप का केंद्र रह चुका है
पिछले चार साल में एनसीआर कभी भूकंप का केंद्र नहीं रहा


नोएडा: शहर से मात्र 55 किमी दूर बागपत और शामली के बीच का एरिया दो बार भूकंप का केंद्र रह चुका है। इस बार भूकंप का केंद्र नोएडा का सेक्टर-128 था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट के अनुसार, BHUKAMP भूकंप रात 8 बजकर 57 मिनट पर आया था। भूंकप का झटका केवल 1.5 रिक्टर स्केल का होने की वजह से महसूस नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि यह झटका यदि 5 रिक्टर स्केल या उससे अधिक का होता तो यहां काफी नुकसान हो सकता था। जमीन से मात्र 6 किमी. नीचे भूकंप का केंद्र रहा है, लेकिन तीव्रता मामूली होने की वजह से हाइराइज सोसाइटी को किसी प्रकार के अंदरूनी नुकसान की संभावना नहीं है।

BHUKAMP के झटके

BHUKAMP भूकंप के झटके आते ही नोएडा के लोगों का डर बढ़ जाता है। यहां ऐसी आपदा से निपटने का कोई इंतजाम नहीं है। दूसरे यहां काफी संख्या हाइराइज सोसाइटी हैं। 2019 में लगातार तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, उस समय एक बार का केंद्र नोएडा से मात्र 55 किमी. दूर बागपत और शामली के बीच का एरिया रहा था। इससे पहले 2012 में भी बागपत और शामली के बीच का एरिया ही भूकंप का केंद्र रहा था। दोनों ही बार 4 रिक्टर स्केल से कम की तीव्रता की वजह से नुकसान की बात सामने नहीं आई थी।

भूकंप BHUKAMP रोधी इंतजाम नहीं


अगर चार रिक्टर स्केल की तीव्रता के साथ नोएडा भूकंप का केंद्र होता तो जानकारों का कहना है कि हाइराइज सोसाइटियों को अंदरूनी नुकसान हो सकता है। गनीमत यही रही कि 1.5 रिएक्टर स्केल की तीव्रता का झटका होने की वजह से यहां भूकंप का केंद्र होने के बाद भी महसूस तक नहीं हुआ। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 में लाया गया था। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की अधिकांश बिल्डिंग का निर्माण उसके बाद ही हुआ है। इसके बावजूद 30-35 प्रतिशत बिल्डिंग में भी भूकंप रोधी इंतजाम नहीं है।

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ज्यादा तीव्रता का झटका दे सकता है बड़ा दर्द


भूकंप को लेकर संवेदनशीलता के मामले में एनसीआर सिस्मिक जोन-4 में आता है, जो कि रिक्टर स्केल पर तीव्रता 6 तक का झटका आने और भूकंप का केंद्र यहां होने पर भारी तबाही मचा सकता है। रेकॉर्ड के अनुसार, साल 2012 से लेकर 2019 तक एनसीआर 8 बार भूकंप का केंद्र रह चुका है। इसके बाद पिछले चार साल में एनसीआर कभी भूकंप का केंद्र नहीं रहा और इस बार फिर एनसीआर का नोएडा भूकंप का केंद्र रहा है। रेकॉर्ड के अनुसार 11 नवंबर 2013 को सुबह 7 बजे से 10 बजे तक 2.5 से 3 तक की तीव्रता के भूकंप के तीन झटके महसूस किए गए थे, उस समय एनसीआर ही भूकंप का केंद्र था। कई हाइराइज सोसाइटी में उस समय लोगों को ऐसा महसूस हुआ था जैसे झूले पर बैठे हो।

BHUKAMP


NOIDA , ग्रेनो में करीब 300 से ज्यादा हाइराइज सोसाइटी के प्रॉजेक्ट हैं। इनमें करीब 200 से ज्यादा में 10 लाख से ज्यादा आबादी रह रही है। यह शहर सिस्मिक जोन-4 में आता है। इसके बावजूद डिजास्टर मैनेजमेंट सेल एक्टिव नहीं है। इस सेल में न तो जरूरत के अनुसार मैनपावर और संसाधन हैं और न ही ट्रेंड प्रोफेशनल। कभी इस आपदा सेल के माध्यम से किसी सरकारी अस्पताल या अन्य बिल्डिंग में मॉक ड्रिल करा दी जाती है, लेकिन इस प्रकार की मॉक ड्रिल का जमीनी स्तर पर कोई फायदा नजर नहीं आता।

BHUKAMP भूकंप


आपदा विशेषज्ञ
(यूनिसेफ के पूर्व राज्य सलाहकार, स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम) मनोज कुमार सिंह ने कहा कि संवेदनशीलता के मामले में नोएडा जोन-4 में आता है। यदि यहां केंद्र होने पर 5 रिक्टर स्केल से अधिक की तीव्रता का भूकंप आता है तो तबाही मच सकती है। साथ ही, आम लोगों और बचाव कार्य करने वाले दलों को पहले से प्रशिक्षण देने की नियमित जरूरत है। इससे ऐसी आपदा आने पर जोखिम को 60 फीसदी तक कम किया जा सकता है। जिलाधिकारी (अध्यक्ष डिजास्टर मैनेजमेंट सैल, गौतमबुद्धनगर) मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि जिला आपदा प्रबंधन कमिटी की बैठक जल्द की जाएगी। इस बैठक में कमिटी से संबंधित जो भी कार्य कराने के लिए संबंधित अधिकारियों और स्टाफ को जो जिम्मेदारियां दी गई है, उनकी समीक्षा की जाएगी। जिन कार्यों और जिम्मेदारियों को लेकर सेल एक्टिव नहीं है, उन पर फोकस बढ़ाया जाएगा।

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